#बंगला_मैथिली

रिजल्ट

ई गल्प आई फेसबूक पर एक गोट बंगला पेज “बांग्लाय लेखालेखी” पर भेटल छल। एकर लेखक छथि श्री सुरोजीत घोष। प्रस्तुत केने छलीह ‘श्रीमती सास्वती बासुरायचौधुरी’। गल्प नीक लागल त’ एकरा मैथिली में अनूदित करबाक धृष्टता कए रहल छी।


चिकन रोल खेबाक जिद्द पकड़ि लेने छलै ओ बच्चा। माय कीनतै नै, आ बच्चा सेहो एक दम सँ अरबद्धल, बिना कीनेने छोड़तै नै। 


बच्चाक बयस कत्तेक हेतै, वैह 10 या 11 बरिस। पीठ पर स्कूल बैग, संभवत: बच्चा पचमा में पढैत हेतै। 


हमहूँ रेस्टोरेन्टक आगू में ठाढ़ चिकन रोल खाइत ओइ माय-बेटाक क्रिया-कलाप देखि रहल रही।


बच्चा अप्पन जिद पर अड़ल। कहलकै,


-चिकन रोल कीन देबही कि नै से कह?


माय खिसिया क’ कहलकै,


-तोरा लाज होई छौ कि नै? एहन खराब रिजल्ट के बादो कहै छिही चिकन रोल खाएब? चल घर, ‘तोरा बाबा’ (बंगला में पिताजी के ‘बाबा’ कहल जाय छै) के सब गप्प कहै छियौ आई।


माय किएक नै किनैत रहै सेहो बुझबा में आबि गेल रहय।


स्कूल केर वार्षिक परीक्षा केर रिजल्ट नीक नै भेल रहै बच्चाक, सएह कारणे माय खिसियाएल रहै। जे से, माएक बात सुनि बच्चा कहलकै,


- से तोरा बाबा के जे कहबाक हौ से कही गे, मुदा पहिने हमरा रोल कीन क दे।


- हँ! हँ ! किएक ने! तोरा खाली खाई बेर में नीके निकुत चाहियौ मुदा पढ़ाई लिखाई बेर में दसो तरहक बहन्ना। सएह ने ! ई जखन जे कहैया से बना बना क’ खियाबै छीयै, आ एम्हर परीक्षा के कॉपी में गोल गोल लड्डू। रिजल्टो ख़राब भेलाक बाद तोरा मोन मे एकको रत्ती आनि-अपगरानि नै छौ, देखलही ‘श्रीजा’ के सब विषय में 90% स’ ऊपर तैयो ओकर मोन दुखी छै। हाथ में रिजल्ट अबिते कान’ लागल रहै। एत्तेक नम्बर पेलाक बादो श्रीजा आ ओकर माइक मोन दुखी भ’ गेलै, ठीक सं बातो नै केलकै ककरो सँ, आ एमहर तों ..... एक्को रत्ती मोन में कुच्छो नै लगई छौ तोरा?


मायक ई सब बातक कोनो प्रभाव नै रहै बच्चा पर। ओ चिकन रोल खाइए क’ रहतै। 


अंतत: बाध्य भए माय के चिकन रोल किनहे पड़लै। बच्चा चिकन रोल पाबि एक हबक्का लए माय के पुछलकै,


- कनी तोहू खेबे?


माय खिसिया क’ कहलकै,


- तोहीं हूड़ि ले। लाज़–बीज नै छौ एक्को रत्ती, श्रीजा के देख क’ सीख, बुझलही।


- बच्चा खुशी मोने रोल खा बैग सँ बोतल निकालि घट-घट कए थोड़े पानि पीबि पुछलकै,


- के? श्रीजा? ओकरा त’ हम सब 'नक-भेमही' कहै छियै।


ओकरा एक सौ में एकसौ दसो मिल जेतै ने तैयो खुशी नै हेतै। खाली ओहे नै, हमरा क्लास में बहुतो एहन छौरी सब छै जकरा सबके आनंदे नै करय आबै छै।


बच्चाक बात सुनि माय कोनो उत्तर नहि दय ओकर हाथ पकड़ि घीचैत-घीचैत ल’ क’ चलि गेलैक। 


बच्चाक एहन हाव-भाव आ गप्प सुनि हम अप्पन हँसी रोकि नै पेलहुँ। लग में आओरो एक भद्रलोक छलाह सेहो ई सब देखि सुनि हँसि रहल छलाह।  


मोने-मोन सोचैत रहलहु जे बच्चाक बात में किछु ‘बात’ त’ अवश्य रहैक। हमरो सहबक सँग किछु लड़की सब रहै जकरा कतबो नम्बर किएक ने भेटि जाय, एक सौ में एक सौ भेटलाक बादो मुँह पर धुनि लागले रहैत रहै। 


लड़की सब एहने होई छै, बढ़ियां रिजल्ट भेलाक बादो आनन्दक अनुभव नै होई छै ओकरा सबके। से पहिनोंहूँ होइत रहै आ एखनों सैह छै।


रोल खा, बिल पेमेंट कए आबि गेलौं। घर आबि देखी त’ आने महाभारत। एत्तौ देखै छी एक्के खिस्सा। विषय भेल सैह परीक्षाक रिजल्ट।


रिजल्ट हमर भैगनीक। ई क्लास सात में पढ़ाई क’ रहल अछि। असल में हमर भैगनी बाल्यावस्थहि सँ हमरे सब संग रहैत अछि। घर ढुकबाक संगहि हमर माँ कहलक,


- ओकर रिजल्ट देखहक त’ कनी।


पुछलियई,


- की भेलैये?


माँ कहलनि


- पढ़तै लिखतै तखन ने बढियाँ रिजल्ट हेतै। गणित में कत्तेक नम्बर छै देखहक ने कनी।


हम मार्कशीट हाथ में ल’ क’ देखल जे ठीके गणित में कम नम्बर भेटल छै। बड्ड कम नम्बर। मार्कशीट देखैत कहलियै, 


- ओकर माँ पापा के फोन क’ क’ कहलहिन?


माँ कहलक,


- हँ फोन केने रहियइ। एहन नंबर देखक’ केकरा नीक लगतै? सबहक मोन दुखी छै।


एमहर जिनकर रिजल्ट पर ई घमासान बजरल छल से बुच्ची तखन एकटा कुर्सी पर बैसल आ आओर एकटा कुर्सी पर पैर राखि शाहरुख खानक एकटा हिन्दी फिल्म देखबा में व्यस्त आ हाथ में छनि ‘नलेन गुड़क पाटली’ (खजूरक रस सं बनल गुड़ के ‘नलेन गुड़’ कहल जाई छै।)


तत्क्षण हमर स्मृति-पटल पर किछुए काल पहिने देखल ओ घटना आबि गेल, वैह बच्चा आ रोल बला घटना, खराब रिजल्ट एलाक बादो कोनो पश्चाताप किम्बा कोनो संकोचक अनुभव नै ने रहै एक्को मिसिया। त’ हम कनी तमसएले स्वर में कहलियै,


- एँ गे तों सिनेमा देखै में लागल छिही? कह त’ एहन खराब रिजल्ट देख क’ तोहर माय के कत्तेक तकलीफ होइत हेतौ?


पाटली खाइत खाइत बाजल,


- रिजल्ट त’ हम्मर खराब भेलैये, तकलीफ़ त’ हमरा होई के चाही ने, सब के एत्तेक तकलीफ़ किएक भ’ रहल छै? कहाँ, हमरा मोन में त’ कनिको तकलीफ़ नहि भए रहल अछि? 


हमरा त’ बुझु जे किछु नहि फुरा रहल छल जे एहन समय में की कहल जाय। हँसी के रोकबा में असमर्थ भए गेलहुँ।


किछुए समय पहिने जे धारणा बनल छल ताहि में कनी परिवर्तन करए पड़ल। समय काल बदलि गेल छै। आई काल्हि। खराबो रिजल्ट भेलाक बाद आई काल्हिक बच्चा-बुच्ची सब अप्पन मोन के नियंत्रण में राखि मोनक आनन्द के उपभोग करबा में सक्षम छै। आ रिजल्ट चाहे खराबे होई ने, खेनाई संगे कोनो ‘कॉम्प्रोमाइज़’ नै।

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